करैरा का ‘खेल योद्धा’: खुद सेना में नहीं जा सके, मगर सैंकड़ो को पहना चुके हैं वर्दी।


करैरा अनाज मंडी के अंदर बनाया ट्रैक एवं किले की कचहरी को बनाया ट्रेनिंग का मैदान 

करैरा : - एक सपना जो खुद अधूरा रह गया, लेकिन उसी सपने ने सैकड़ों युवाओं को नई उड़ान दी। करैरा के चरण सिंह लोधी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के संघर्ष की गाथा नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को सच करना चाहते हैं। 2018 में शुरू हुई उनकी छत्रपति शिवाजी राजे फिजिकल एंड स्पोर्ट्स एकेडमी जो करैरा में सी एस आर फिजिकल एंड स्पोर्ट एकेडमी के नाम से जानते है ।आज करैरा जैसे छोटे कस्बे को राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिला रही है। इस एकेडमी से अब तक एक सैंकड़ा से अधिक युवा भारतीय सेना और अन्य सुरक्षाबलों में भर्ती हो चुके हैं, जबकि 40-50 बच्चे राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। यह चरण सिंह की मेहनत और जुनून का नतीजा है, जिन्होंने अपने अधूरे सपनों को दूसरों की सफलता का आधार बनाया।
चरण सिंह का बचपन से सपना था कि वे भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करें या फिर एक स्पोर्ट्स टीचर बनकर नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करें। लेकिन हालात ने उनके इस सपने को पूरा होने नहीं दिया। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने जैसे अन्य युवाओं के लिए एक मिसाल कायम की। 

खेल का मैदान नहीं था तो करैरा अनाज मंडी को रनिंग ट्रैक और करैरा दुर्ग की कचहरी को फिजिकल ट्रेक बना दिया 

करैरा में खेल के लिए कोई खास सुविधाएं नहीं थीं—न तो दौड़ने का ट्रैक था, न ही ट्रेनिंग के लिए उपकरण। लेकिन चरण सिंह ने इन कमियों को अपनी राह में रोड़ा नहीं बनने दिया। अपने शिष्यों के साथ मिलकर उन्होंने चंदा इकट्ठा किया और एक साधारण अनाज मंडी की जमीन को ट्रैक में तब्दील कर रख दिया। जब संसाधनों की कमी हुई, तो करैरा किले की कचहरी को ही अपनी ट्रेनिंग का मैदान बना लिया। यहाँ तक कि मौसम की मार और सीमित सुविधाओं के बीच भी उनकी मेहनत जारी रही।


एकेडमी में आने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब और साधारण परिवारों से हैं। कई के पास जूते तक नहीं होते, तो कई को पौष्टिक भोजन भी नसीब नहीं होता। लेकिन चरण सिंह और उनकी पत्नी, जो दोनों प्राइवेट स्कूल में शिक्षक हैं, इन बच्चों के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। मूल रूप से टीला गांव के रहने वाले यह दंपति करैरा में किराए के मकान में रहता है। उनका अपना जीवन भी संघर्षों से भरा है, मगर वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की ट्रेनिंग और उनकी जरूरतों पर खर्च करते हैं। जेवलिन थ्रो, लॉन्ग जंप, हाई जंप, ट्रिपल जंप जैसे खेलों में प्रशिक्षण देकर वे बच्चों को न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत बना रहे हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और अनुशासन भी भर रहे हैं।
चरण सिंह की मेहनत का असर अब पूरे करैरा में दिखने लगा है। उनकी एकेडमी से निकले युवा न सिर्फ खेल के मैदान में बल्कि देश सेवा में भी अपना योगदान दे रहे हैं। शहरवासियों को अपने इस ‘खेल योद्धा’ पर गर्व है, जो खुद कठिनाइयों में जीते हैं, लेकिन दूसरों के सपनों को पूरा करने में अपनी खुशी तलाशते हैं। उनकी यह पहल न सिर्फ करैरा, बल्कि पूरे शिवपुरी जिले के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। यह एकेडमी अब सिर्फ एक खेल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और सफलता की ऐसी पाठशाला है, जो युवाओं को अपनी सीमाओं से परे सोचने के लिए प्रेरित करती है।
चरण सिंह की कहानी हमें सिखाती है कि सपने पूरे न हों तो भी उन्हें दूसरों के लिए प्रेरणा बनाया जा सकता है। उनकी मेहनत और समर्पण ने साबित कर दिया कि अगर जुनून हो, तो संसाधनों की कमी भी किसी लक्ष्य को हासिल करने में बाधा नहीं बन सकती। करैरा का यह ‘खेल योद्धा’ आज हर उस युवा के लिए मिसाल है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहता है। उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।

जिन लोगो को सफलता प्राप्त हुई है उनकी जुबानी 

(1)  बचपन से देश की सेवा करने का सपना था लेकिन सपना साकार करने के लिये घर से बाहर जाकर तैयारी करनी पड़ती है आजकल ग्रामीण अंचल में बेटियो को घर से बाहर पढ़ने नहीं जाने देते, मैंने स्वयं घर पर ही पढ़ाई की और एग्जाम निकाला एवं दोस्तो ने बताया कि  करैरा में एक सीएसआर एकेडमी निःशुल्क फिजिकल की तैयारी करा रही है करीब 1 महीने ट्रेनिंग प्राप्त की फिजिकल भी निकल गया , बहुत ही अच्छी मेंहनत सर कराते है जिससे सफलता प्राप्त हुई । 

नैंसी लोधी ( चयनित छात्रा मध्य प्रदेश पुलिस निवासी ग्राम दुल्हई तहसील पिछोर )

(2) लॉकडाउन से पहले ही एकेडमी से जुड़ा है फ्री फिजिकल की तैयारी की, यहाँ तक की डाइट के लिए पैसे नहीं होते थे तो वह भी हमने कहीं बार सर से लिये थे आज के समय में ऐसे सर भगवान के समान है उन्हें अनुशासन बहुत पसंद है । उनके आशीर्वाद से आज में अग्निवीर में चयनित हो गया जॉइनिंग लैटर आना बाकी है । सन 2023 एथेलेटिक गेम में हमारी टीम 
नेशनल लेविल पर क्वालीफाई करके आई थी ।

सतेंद्र पाल (आर्मी अग्निवीर एवं  रिले दौड़ में राष्ट्रीय धावक )
उप संपादक राजेन्द्र गुप्ता 
मो नं,8435495303