करैरा : मुस्लिम समुदाय का पवित्र रमजान महीना चल रहा है और ईद-उल-फितर का त्योहार नजदीक आ रहा है। यह महीना अल्लाह की इबादत, कुरान की तिलावत और रोज़े के जरिए संयम और समर्पण का समय है। करैरा में इस पवित्र महीने का उत्साह चरम पर है, जहां मक्का मस्जिद में हाफिज़ ओवैस, जामा मस्जिद में हाफिज़ हुमायूं, नूरानी मस्जिद में हाफिज़ शहजाद, मदीना मस्जिद में हाफिज़ मुजाहिद, मोती मस्जिद में हाफिज़ अतीक मौलाना, मरोड़ीपुरा मस्जिद में हाफिज़ शाहरुख, महबूब मस्जिद में हाफिज़ शोयब और काजी मस्जिद में हाफिज़ आमिर द्वारा नमाज़ और तरावीह अदा की जा रही है। आज 27वां रोज़ा संपन्न हो चुका है और अब केवल 2 या 3 रोज़े बाकी हैं। ईद की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं, बाज़ारों में रौनक बढ़ गई है और लोग कपड़े, मिठाइयाँ और सजावट का सामान खरीदने में जुटे हैं। रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है- रहमत, मगफिरत और जहन्नम से खालसी, जिनकी व्याख्या मोती मस्जिद के हाफिज़ अतीक मौलाना ने विस्तार से की है।
हाफिज़ अतीक मौलाना ने बताया तीन अशरो का महत्व
मोती मस्जिद के हाफिज़ अतीक मौलाना ने बताया कि रमजान के तीन अशरे अपने खास मकसद और दुआओं के लिए जाने जाते हैं। पहला अशरा, जो पहले 10 दिनों का होता है, “रहमत” का समय है। इस दौरान रोज़ेदार अल्लाह की रहमत और बरकत की दुआ करते हैं। हाफिज़ अतीक मौलाना के अनुसार, इस अशरे में नमाज़, कुरान की तिलावत और दान-पुण्य पर जोर दिया जाता है, ताकि अल्लाह की कृपा प्राप्त हो। दूसरा अशरा, जो 11वें से 20वें दिन तक चलता है, “मगफिरत” यानी माफी का होता है। इस समय रोज़ेदार अपने गुनाहों की क्षमा मांगते हैं। हाफिज़ अतीक मौलाना ने कहा कि सच्चे दिल से की गई दुआ इस अशरे में अल्लाह तक पहुँचती है और बंदों को माफी मिलती है। तीसरा अशरा, जो 21वें दिन से शुरू होकर 29 या 30वें दिन तक चलता है, “जहन्नम से खालसी” का प्रतीक है। इस अशरे में शब-ए-कद्र जैसी पवित्र रात आती है, जिसे 27वीं रात माना जाता है। हाफिज़ अतीक मौलाना ने बताया कि इस दौरान जहन्नम की आग से बचने की दुआ की जाती है और कई लोग एतिकाफ में बैठकर इबादत करते हैं। करैरा की मस्जिदों में इस अशरे में तरावीह और दुआओं का आयोजन जोर-शोर से हो रहा है, जिसमें हाफिज़ और मौलाना लोगों को अल्लाह की राह पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं।
करैरा में रमजान और ईद का उत्साह पूरे शबाब पर
रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है, जो चांद के दिखने पर निर्भर करता है। 27वां रोज़ा पूरा होने के साथ ही करैरा में ईद-उल-फितर की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। रोज़ेदार सुबह सहरी और शाम को इफ्तार के साथ अपने रोज़े पूरे कर रहे हैं और रात में तरावीह की नमाज़ में शामिल होकर अल्लाह का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। मक्का मस्जिद, जामा मस्जिद, नूरानी मस्जिद और अन्य मस्जिदों में कुरान की तिलावत और दुआओं से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। हाफिज़ अतीक मौलाना ने कहा कि रमजान न केवल इबादत का महीना है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और मदद की भावना को भी बढ़ाता है। ईद का त्योहार इस महीने की इबादत का इनाम है, जो खुशियाँ और एकता का संदेश लाता है। करैरा के बाज़ारों में लोग नए कपड़े, मिठाइयाँ और बच्चों के लिए तोहफे खरीद रहे हैं। बच्चे भी ईद की खुशी में शामिल हैं और अपने परिवार के साथ इस पर्व का इंतज़ार कर रहे हैं। यह महीना करैरा के मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण बन गया है। शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद मनाई जाएगी, जिसके लिए सभी तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
पत्रकार राजेन्द्र गुप्ता
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